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एक विचार

एक  अनुभव, एक विचार.....जीवन की सच्चाईयां इतिहास का हिस्सा होती है। बहुत सी घटनाएं ऐसी होती है जो एक शिक्षा बनकर कर लोगों के सामने आती है ।जीवन के अनुभव समय सीमा से परे होते हैं।हम एक बार यह सोचे कि हमारी जितनी भी लोकोक्तियां हैं वे अनुभवों के आधार पर अशिक्षित लोगों द्वारा बनाई गई है और वह हर युग में उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी तब थी।
एक ऐसी ही घटना का यहां उल्लेख करना चाहूंगी जो जीवन की कठिन परिस्थितियों को झेलने का हौसला प्रदान करती है।
यह आज की परिस्थितियों में अधिक प्रासंगिक है क्योंकि इसमें बच्चों की परवरिश से संबंधित एक बहुत ही बड़ी शिक्षा है कि हमें बच्चों को सामाजिक बनाना चाहिए केवल पढ़ाई में हरदम अव्वल रहना बहुत बड़ी बात नहीं है। उसे समाज में रहना है, समाज के लोगों के साथ जीवन जीना है तो उसे यह सब भी आना ही चाहिए ।
इसलिए असफलता भी सफलता के लिए आवश्यक है।गड़बड़ कहाँ हुई : एक बहुत ब्रिलियंट लड़का था। सारी जिंदगी फर्स्ट आया। साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया। अब ऐसे लड़के आम तौर  पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन IIT चेन्नई में हो गया। वहां से B Tech किया और वहां …

श्रावण मास

श्रावण मास का शुभारंभ हो चुका है। सभी लोग इस मास  में भगवान शंकर की भक्ति बहुत ही शुद्ध चित्त और शांत मन से करते हैं। इस मास में अमरनाथ जी की यात्रा राखी पूर्णिमा के दिन समाप्त होती है एवं बर्फ के शिवलिंग के दर्शन भी पूर्ण हो जाते हैं। आस्था और विश्वास का संगम है श्रावण मास। इस मास में भक्ति अपने चरम पर होती है तथा कावड़ यात्रा भी आरंभ हो जाती है या यूं कहें कि आज से आरंभ हो गई है।
आप सभी को श्रावण मास की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। सभी के लिए यह श्रावण मास तथा आने वाले सभी दिन मंगलकारी हो, यही प्रार्थना करती हूं। श्रावण मास के महत्व तथा व्रत की महिमा और विधि-विधान की चर्चा प्रस्तुत आलेख में की गई है। कृपया समय निकाल कर पढ़ने का कष्ट करें ताकि हमारा आचरण, हमारी बुद्धि और हमारा चित्त भी इस मास की तरह पवित्र हो जाए ।जय शिव शंकरश्रावण मास ( भोलेनाथ के भक्तों का त्योहार )  श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है सुनना। अर्थात सुनकर धर्म को  समझना। वेदों को श्रुति कहा जाता है अर्थात उस ज्ञान को ईश्वर से सुनकर  ऋषियों ने लोगों को सुनाया था। यह महीना भक्तिभाव और संत्संग के लिए होता  है। जिस भी …

सनातन गिनती

सुप्रभात
सत्य सनातन धर्म अपने आप में बहुत विशाल है। जहां से हम गिरना प्रारंभ करते हैं वहीं से इसकी विशालता का अंदाजा लगाया जा सकता है। (यहां यह कहना उचित नहीं होगा कि इसका आरंभ यह से होता है क्योंकि इसके आदि और अंत के बारे में कुछ भी कहना अतिशयोक्ति होगी) उसी गिनती में ही उसकी भव्यता, इसकी विशिष्टता , इसकी प्रमाणिकता ,वैज्ञानिकता ,अनंतता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
  प्रस्तुत तथ्य का प्रमाण निम्न है.....
सनातन धर्म की प्रमुख मान्यताएँदो लिंग : नर और नारी ।
दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)।
दो अयन : उत्तरायन और दक्षिणायन।तीन देव : ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी।
तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल।
तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।
तीन स्थिति : ठोस, द्रव, वायु।
तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत।
तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा।
तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव।
तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी।
तीन काल : भूत, भविष्य, वर्तमान।
तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना।
तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं।
तीन शक्ति : इच्छाशक…