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Showing posts from June, 2018

अष्टावक्र : सम्पूर्ण वयक्तित्व

आज हम बात करते हैं ऋषि अष्टावक्र के बारे में, अष्टावक्र गीता के बारे में कि किस प्रकार अष्टावक्र जी का जन्म हुआ, उनके शरीर में 8 विकार कैसे आए? और किस तरह से उन्होंने शास्त्रार्थ में अनेक ऋषियों को पराजित किया।उनका  एक- एक प्रश्न एवं एक - एक उत्तर प्रत्युत्तर बहुत ही गूढ़ एवं सारगर्भित है तथा अपने आप में ही विलक्षण है। इसके साथ हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे ऋषि मुनि कितने विद्वान थे, एवं उनके द्वारा जो शास्त्रार्थ होता था, जो तर्क दिए जाते थे वह कितने यथार्थ एवं शाश्वत होते थे। यह पूरी ही कथा बहुत ही सुंदर एवं रोचक है।



महाराजा जनक के गुरु अष्टावक्र जी एक: एक सम्पूर्ण प्रस्तुति,,,,अष्टावक्र आठ अंगों से टेढ़े-मेढ़े पैदा होने वाले ऋषि थे। शरीर से जितने विचित्र थे, ज्ञान से उतने ही विलक्षण। उनके पिता कहोड़ ऋषि थे जो उछालक के शिष्य थे और उनके दामाद भी। कहोड़ अपनी पत्नी सुजाता के साथ उछालक के ही आश्रम में रहते थे। ऋषि कहोड़ वेदपाठी पण्डित थे। वे रोज रातभर बैठ कर वेद पाठ किया करते थे। उनकी पत्नी सुजाता गर्भवती हुई। गर्भ से बालक जब कुछ बड़ा हुआ तो एक रात को गर्भ के भीतर से ही बोला, हे पिता…

फ़िल्म समीक्षा :वीरे दी वेडिंग

फिल्म समीक्षा: वीरे दी वेडिंग
  यह एक  चर्चित फिल्म है एकता कपूर की और आज ही मैंने इसे देखा है ।इस फिल्म के बारे में बहुत सी सकारात्मक बातें हैं, बहुत से सकारात्मक सुखांत हैं। इसी के साथ - साथ इतने अधिक नकारात्मक चीजें हैं कि वह समाज के सामने यदि उतने  खुलेपन के साथ  आएंगी तो एक अराजकता के साथ, बुरी भावनाओं के सामने आने की संभावना अधिक बनी रहती है ।आज हमारा समाज जिन बुराइयों से जूझ रहा है, वह किसी भी प्रबुद्ध वर्ग से छुपी नहीं है। आज हम अपने युवा वर्ग को अच्छी शिक्षा ,अच्छे संस्कार, बेहतर मानवीय मूल्य, उन्नत सामाजिक मूल्य, यह सब देना चाहते हैं ,और यह हमारा कर्तव्य भी  है। क्योंकि यदि हम अपने इस पीढ़ी को यह सब नहीं देंगे तो  यही युवा वर्ग अपनी आने वाली पीढ़ी को  क्या हस्तांतरित करेंगे?
  सबसे पहले हम बात करते हैं सकारात्मकता की । क्योंकि समीक्षा समालोचना पर आधारित होती है।
इस फिल्म में दो भाइयों के आपसी झगड़े का अंत दिखाया गया है और ऐसा करने के लिए उनके  बच्चों  और उनके दोस्तों के द्वारा  उन्हें  प्रेरित किए जाता  है और वो दोनों पुराना सब कुछ भूल कर  पुन: एक हो जाते हैं । ये बहुत अच्छी …