नारी सशशक्तिकरण

महिला जीवन और चुनौतियां

नारी सशक्तिकरण

परिचय

जब  से सृष्टि की रचना हुई है, तब से ही शायद हम  नारी को सशक्त करने की बात सोच रहे हैं ।वह शायद इसलिए क्योंकि प्रकृति ने नारी को कोमल, ममतामयी,करुणामयी,सहनशील,आदि गुणों से भरपूर  बनाया है ।तब से लेकर आज तक हम नारी को हर रूप में सशक्त करने के बात सोच रहे हैं ।और आज तक नारी कितनी सशक्त हुई है ,कितनी सबल हो चुकी है ,यह हम सब जानते हैं ।यह सब बातें प्रमाणिक है और इन सब का हमारे जीवन पर अत्यधिक प्रभाव भी पड़ता है ,पड़ता जा रहा है।
परंतु इन सबसे हटकर मैं आज नारी सशक्तिकरण के दूसरे पहलू पर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहती हूं। नारी तो प्रारंभ से ही सशक्त है। इसका प्रमाण तो  पग - पग पर मिलता है ।ये क्या प्रमाण हैं , इन सबको बताने से पहले मै यहां यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि नारी को यह महसूस क्यों हुआ कि उसे सशक्त होना है, होना पड़ेगा, और होना ही चाहिए । वो इसलिए कि हमारे समाज में कई लोग उसकी क्षमता को पहचान नहीं पाए ,जान नहीं पाए, और जान पाए तो, मान नहीं पाए, या मानना ही नहीं चाहते है कि नारी हर क्षेत्र में, हर काम में, बेहतर हो सकती है। इसलिए अपने आप को प्रमाणित करने के लिए ,अपने अस्तित्व के अनेकों रुपों को दिखाने के लिए  ही उसे सशक्त बनाने की आवश्यकता पड़ी (पर सच तो ये  है कि सशक्त तो वह है ही।)

अब हम सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो सबसे पहले हम सब अपने अस्तित्व, अपने वजूद की बात करें तो हमें बनाने वाली कौन है?एक नारी। सृजन शक्ति ईश्वर ने पृथ्वी,और नारी को ही प्रदान की है (हलाकि उसमें बीच तत्व की महिमा को,उसकी आवश्यकता को  नकारा नहीं जा सकता )इसके परिप्रेक्ष में स्वरचित कविता की दो पंक्तियां कहना चाहूंगी कि----

"मां है तो श्री है ,आधार है ,
क्योंकि प्रकृति, धरती एक माँ का ही  तो प्रकार है ।
माँ वो है जो खुद मिट कर, औरों को बनाती है, क्योंकि पत्थर पर पिस कर ही, हिना रंग लाती है।
मां और माटी का सदियों पुराना नाता है,
चाह कर भी भला, इन दोनों की हस्ती को कौन मिटा पाता है,
एक जननी है ,तो दूसरी मातृभूमि भारत माता है"।

हमारे वजूद को जिसने बनाया, निर्मित किया वो एक नारी है और  हमारी धरती मां,एक  नारी का ही रूप है जिसकी बदौलत  हम अपने इस वजूद को सुरक्षित रख पा रहे हैं ।और हम सब  भारत मां की संतान  हैं ।यह हमारी खुशनसीबी है ।यहाँ भी माता की आवश्यकता एवं महत्ता दर्शनीय है ।
नारी हर रूप में एक शक्ति है ।वह पुरुष को जन्म देती है, उसका पालन करती है (एक मां के रूप में) आजीवन उसका साथ देती है(एक पत्नी के रुपमें) जिम्मेदार बनाती है, सोचने का नजरिया बदलती है,(एक बेटी के रूप में) और जीवन को आलंबन देती है (पुत्र वधू के रूप में)।
यानि जीवन के हर पड़ाव में ,हर रिश्ते में वह सशक्त है।  यहां सशक्तिकरण भावनात्मक स्तर का है क्योंकि  सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सशक्तिकरण की बातें तो सभी कर रहे हैं, और इन सबके बारे में सभी जानते भी हैं ।परंतु हम कवि लोग भावनात्मक स्तर पर रहते हैं,और हर बात का संबंध ईश्वर से, आस्तिकता से करते हैं ,क्योंकि

"जहां न पहुंचे, रवि वहां पहुंचे कवि"।

महिला जीवन और चुनौतियां
अब बात करते हैं महिला जीवन में आने वाली चुनौतियां की।   प्रदत्त सभी विषयों में से उक्त विषय का चयन यानि "महिला जीवन और चुनौतियां" इसलिए लिया गया है कि जब हम नारी जीवन की बात करते हैं तो उसके संपूर्ण जीवन में सभी पहलुओं पर बात की जाएगी तो परोक्ष से हम इन सभी बिंदुओं को भी अपने विचारों में सम्मिलित करेंगे ।
वास्तव में नारी का जन्म ही कि चुनोतियों  के साथ होता है ।प्राचीन काल से अब तक जैसे "दूध पीती प्रथा" "कन्या भ्रूण हत्या" आदि ऐसे उदाहरण है जब नारी को जन्म से पहले और जन्म लेते ही  अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती होती है। नारी के लिए जन्म से पहले ही जीवन के लिए संघर्ष आरम्भ हो जाता है। किसी और के जीवन में शायद ही ऐसा होता हो।
उसके बाद तो चुनौतियों का जो  दौर शुरू होता है वह आजीवन चलता ही रहता है। और यह चुनौतियां निम्न प्रकार की कही जा सकती है क्योंकि देश काल, वातावरण, शिक्षा, मानसिकता, समाज के नियम, परंपराएं, रीति- रिवाज आदि के आधार पर असमानताएं अपवाद स्वरुप है।

1•  मां का प्यार, परिवार के अन्य सदस्यों का प्यार, संरक्षण, सुरक्षा,आदि पाने की चुनौती---

यहां पर हम कह सकते हैं कि आज भी स्त्री जाति  को कई जगह उतना मान - सम्मान, पालन - पोषण और संरक्षण नहीं मिल पाता, जितने की वह हकदार है । या जितना कि उसका भाई  को मिल पाता है ।और अपने ही परिवार में कई बार उसकी अस्मिता के साथ भी  खिलवाड़ हो जाता है ।हमारे समाज में 60% से ज्यादा बच्चियाँ किसी न किसी प्रकार  से अपने ही   परिवार के सदस्यों द्वारा प्रताड़ित, शारीरिक रूप से शोषित की जाती है ।

2• शिक्षा का अधिकार पाने की चुनोती--
आज भी नारी शिक्षा का स्तर उतना ऊंचा नहीं उठ  हो पाया है कि जितना 21वीं सदी का होना चाहिए। यहां हम समग्र की बात कर रहे हैं, क्योंकि 70% भारत अभी भी गांव में बसता है जहाँ नारी को शिक्षा का उतना अधिकार नहीं मिल पाता जितना की पुरुष को । आज भी लड़कियों की पढ़ाई बीच मे ही छुड़वा दी जाती है क्योंकि हाई स्कूल या सेकेण्डरी स्कूल उनके गांव से दूर होते हैं।

3• अपने मनपसंद करियर के चुनाव की चुनौती----
यहां आकर भी वही सब मुसीबतें सामने आ जाती हैं जो  नारी जीवन की उन्नति में रुकावट बनती है क्योंकि अपने मनपसंद करियर का चुनाव करने से पहले एक नारी को बहुत से पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है जैसे कि उपुयक्त कार्य समय चुनाव,उचित कार्य स्थल  का चुनाव,उचित सुरक्षा स्थितियों का चुनाव आदि। इसलिए कई बार वह चाहकर भी अपने  मन की इच्छा पूरी नहीं कर पाती।

4•  अपनी प्रतिभा के अनुसार अवसरों को प्राप्त करने की चुनौती---
जैसे - जैसे जीवन आगे जाता जाता है वैसे- वैसे  नारी जीवन की चुनोतियां बढ़ती ही जाती है ।अपनी प्रतिभा के अनुसार अवसर या तो उसे मिलते नहीं या मिलते हैं तो उसके लिए कई बार उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। जो उसके नारी होने के अपराध  जैसे ही होता है ।समाज में अपने आप को स्थापित करने के लिए उसे बहुत सी मुसीबतों और बहुत से चक्रव्यूहों का सामना करना पड़ता है ।और यदि आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो भी जायें तो परिवार को  मनाने की चुनौती, 
  स्वयं की उन्नति के लिए दूसरों की रजामंदी की चुनौती, अपने आपको साबित करने के लिए विश्वास की चुनौती आदि। नारी जीवन वास्तव में ही चुनौतियों का भंडार है ।

5•  विवाह के अधिकार,  स्वयंवर की चुनौती---
प्राचीन काल से ही  हमारे इतिहास में सीता स्वयंवर, द्रौपदी स्वयंवर इस बात के प्रतीक है कि उस  समय में भी नारी को अपना वर  चुनने  का अधिकार था। उसे अपने  प्रेम  को सबके सामने अपनाने का अधिकार था ।  परंतु आज हम देखते हैं प्रेम विवाह,औऱ प्रेम को किस नजर से देखा जा रहा है ।कई बार तो नारी को प्रेम करने की सजा अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।यह बड़ी भयावह स्थिति है।

6•  विवाहोपरांत जीवन की चुनोतियाँ--
अपने करियर को बनाए रखने की चुनौती,
अपने परिवार तथा कामकाज के बीच सामंजस्य ,उचित ताल - मेल बनाने की चुनौती, मां बनने की चुनौती ,बच्चे का लालन - पालन करने की चुनौती। यदि नारी नौकरी पेशा है तो बच्चे की शिक्षा, संस्कार की चुनौती ।
स्वयं को किसी  मुकाम पर  स्थापित कर पाने की चुनोती, समाज में इज़्ज़त पाने की चुनोती आदि।
इस प्रकार हमने देखा कि नारी जीवन तो जन्म से पहले से लेकर मृत्यु तक चुनौतियों से ही भरा हुआ है ।अतः नारी जीवन आसान नहीं है। आज नारी सशक्तिकरण में मैं उन सभी नारी शक्तियों का हृदय से सम्मान करना चाहूंगी जिन्होंने इन सब चुनौतियों का किसी न किसी रुप से सामना किया और आज उन सब से आगे निकल कर हम प्रत्यक्ष रुप से नारी सशक्तिकरण का उदाहरण बनकर सामने आई है ।इससे अधिक जीवंत उदाहरण और क्या हो सकता है "नारी सशक्तिकरण" का।
अतः उन सभी नारी शक्तियों को बधाई एवं सभी आयोजक मंडल का भी हार्दिक आभार जिन्होंने वास्तव में ही नारी शक्ति , को  नारी को सशक्त करने में अपना प्रायोगिक सहयोग दिया। अंत में सिर्फ यही कहना चाहूंगी कि

" माना कि पुरुष बलशाली है ,पर जीतती हमेशा  नारी है
  सांवरिया के छप्पन भोग पर, सिर्फ एक तुलसी भारी है"।
धन्यवाद

लेखिका
डॉ• विदुषी शर्मा

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