सफलता की कहानी

सफलता की कहानी

आज मैं बात कर रही हूं सफलता की, यानि सक्सेसsuccess ।किसी की भी जिंदगी में किसी भी प्रकार की सफलता (चाहे वह उसे किसी भी क्षेत्र में मिली हो जैसे खेल, साहित्य, मनोरंजन, कला इत्यादि) उसे ऐसे ही नहीं मिल जाती। उसके लिए उसे बहुत कुछ करना पड़ता है, बहुत कुछ सहना पड़ता है, बहुत कुछ करके दिखाना पड़ता है,  सीढ़ी  दर सीढी ऊपर जाना पड़ता है , तब कहीं जाकर सफलता हाथ लगती है।
आजकल बहुत से लोग मुझे कह रहे हैं कि आजकल तो आप Facebook पर छाए हुए हो , नित नए अचीवमेंट, उपलब्धियां प्राप्त कर रहे हो तो, इन सब के पीछे मेरी अथक मेहनत है, मेरे बहुत से अरमान हैं जिन्हें मैं पूरा नहीं कर पाती हूं, मेरे परिवार का सहयोग है, मेरे बच्चों का त्याग है, मेरी सहनशीलता है, मेरी असफलताएं हैं और इसके साथ-साथ शादी के बाद का 19 साल का वह समय भी इसमें जोड़ा जाएगा जिस समय में मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाई। केवल परिवार की ही होकर रह गई थी ।अब मुझे खुशी है कि मैं अपने पूरे दायित्व अब तक जो जरूरी थे, उन्हें निभाने के बाद समाज के लिये अपने दायित्व को निभाने आई हूं,समाज के सामने प्रस्तुत हुई हूं ,और पारिवारिक दायित्व जो  अब भी साथ-साथ चल रहे हैं क्योंकि कर्तव्य तो तब तक चलते रहेंगे, कर्म तब तक चलता रहेगा (और यह प्रत्येक मनुष्य के लिए जरूरी भी है) तब तक सांसे चल रही हैं।
इसलिए किसी की भी कामयाबी को इतनी आसान नहीं मानना चाहिए। इन सब के लिए एक सामूहिक प्रयास आवश्यक होता है जिसमें बड़ों का आशीर्वाद और ईश्वरीय शक्ति की इच्छा का बहुत अधिक महत्व है ।जब यह सब साथ मिल जाते हैं तब कहीं जाकर "सफलता" मिलती है ।
इसलिए सफलता इतनी सस्ती नहीं है ।इसके लिए बहुत सी कीमत चुकानी पड़ती है ,तो आगे से किसी को भी सफलता अगर मिलती है तो  उसे देखकर उस सफलता के पीछे के संघर्ष का भी अंदाजा लगाने का प्रयास करना चाहिए, खासकर जब वह एक गृहणी हो ,एक औरत हो।
बस शेष फिर।

विशेष -  यहां मैं किसी पर भी कोई विशेष टिप्पणी नहीं करना चाहती हूं, यह मेरे मन के भाव हैं ।शायद इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
धन्यवाद।
लेखिका
डॉ विदुषी शर्मा

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